क्यों लगता है…

क्यों लगता है… मुश्किल से सम्भाला था अपने आप को इन पिछले दिनों क्यों लगता है कि फिर वही गुलाबी शाम है क्यों लगता है कि मैंने तुम्हारे लिए दरवाज़ा खोला है …बड़ी मुश्किल से सम्भाला था मुश्किल से सम्भाला था अपने आप को इन पिछले दिनों क्यों लगता है कि तुमने फिर...

A Tribute to my Father…

A Tribute to my Father… In the last few weeks as I frequently negotiated the commute from home to hospital, and back, a deluge of questions flooded my mind. To some I found answers but most remained what they were – questions. But one realisation did dawn...